नर्मदा झाबुआ ग्रामीण बैंक का हुआ विलय,अब बनेगी मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक

Amaltas

सोमेश उपाध्याय
बागली। लम्बे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर रही नर्मदा-झाबुआ ग्रामीण बैंक और सेंट्रल मप्र ग्रामीण बैंक का आपस में विलय हो रहा है। विलय के बाद दोनों बैंक मप्र ग्रामीण बैंक के नाम से जानी जाएंगी। इसका मुख्यालय इंदौर में होगा। 1 अप्रैल 2019 तक विलय की औपचारिकताएं पूरी हो जाएंगी। केंद्र सरकार ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं। केंद्र सरकार इन दिनों एक प्रदेश एक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की नीति पर काम कर रही है। इसके तहत इन दोनों के साथ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा प्रायोजित मध्यांचल ग्रामीण बैंक का भी विलय प्रस्तावित था, लेकिन उक्त बैंक की गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) 26.13 फीसदी होने के कारण अभी इसे इस विलय प्रक्रिया से बाहर रखा गया है। सरकार आने वाले दिनों में इस पर दोबारा विचार करेगी।

नए प्रस्तावित बैंक में केंद्र सरकार की शेयरपूंजी 181.32 करोड़ रुपए होगी, जबकि राज्य सरकार की शेयर पूंजी 54.40 करोड़ रुपए और प्रायोजित बैंकों की 106.92 करोड़ रुपए होगी। उल्लेखनीय है कि सेंट्रल मध्यप्रदेश बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और नर्मदा-झाबुआ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक बैंक ऑफ इंडिया द्वारा प्रायोजित है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह विलय बैंकों का कैपिटल बैस बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। इससे बैंकों का कामकाज और भी बेहतर होगा।उक्त जानकारी बागली शाखा प्रबंधक श्रीपद वर्डनेकर ने दी!

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