राबड़िया गांव में एक फॉर्म हाउस और गोशाला में दर्जनों गायों की मौत…

दलदल में फंसी मिली कई जिंदा और कई मृत गायें… कई मृत गायें पहाड़ी पर मरी पड़ी मिली…

उक्त डेयरी फार्म एवं गोशाला भाजपा समर्थित व्यक्ति का बताया जा रहा है…

नगर निगम की टीम व अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे…

नगर निगम देवास आवारा मवेशियों को पकड़ कर यहां सौपता हैं…

लगभग 200 गाये नगर निगम से भेजी गई हैं यहां…

नगर निगम और गोशाला प्रबंधन की बड़ी लापरवाही आई सामने…

मोके पर निगम के अधिकारी, निगम सभापति सहित अनेक पार्षद मौजूद…

बीएनपी और टोंकखुर्द थाने का बल सहित देवास CSP भी मौके पर पहुंचे…

Amaltas

देवास। मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार एक तरफ जहां पंचायत स्तर पर गौशाला खोलने की बात कर रही है वही दूसरी ओर देवास से 15 किलोमीटर दूर ग्राम राबढ़िया की एक गौशाला में दलदल में फंसने से 1 दर्जन से अधिक गायों की मौत हो गई। हैरानी की बात तो यह है कि गोशाला के बाजू में एक बड़े क्षेत्र में दलदल है, गोशाला का साइड वाले गेट का रास्ता सीधे दलदल में ही जाता है। बताया तो यह भी जा रहा है यहां पिछले कई दिनों से गायों की मोत होने का सिलसिला चल रहा है। इसका खुलासा आज उस समय हुआ जब शिकायत मिलने पर नगर निगम के सभापति कुछ पार्षदों के साथ मौके पर पहुंचे, उनके अलावा वहां BNP थाना प्रभारी भी पहुंच गए और रेस्क्यू चला कर कुछ गायों को दलदल से जिंदा निकाला गया। मामले में नगर निगम सहित गोशाला प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आई है।

दरअसल हुआ यह कि देवास के नूतन नगर में रहनेवाले अम्बाराम की दो गायें पिछले 3-4 दिनों से लापता हो गई थी। उन्हें जानकारी लगी कि नगर निगम का अमला उन्हें पकड़ कर ले गया है। तब अम्बाराम अपनी गायों को ढूंढते हुए राबड़िया स्थित उस गोशाला में पहुंचा, जहां नगर निगम द्वारा शहर से पकड़ी जाने वाली गायों को भेजा जाता है। वहां अम्बाराम की गायें तो बंधी दिख गई, किंतु गोशाला का नजारा चोंकानेवाला था।

वहां पास ही दलदल में 6-7 गायें मरी पड़ी दिखी। गोशाला प्रबंधन ने अम्बाराम की गायों को लौटाने से मना कर दिया। इसके बाद अम्बाराम नगर निगम पहुँचा, जहां उसने महापौर सुभाष शर्मा को दास्तान बताई, इसके बाद वह नगर निगम के एक अधिकारी श्रीवास्तव के पास पहुंचा, जब उसने श्रीवास्तव को सूचना देनी चाही तो उसे वहां से भगा दिया गया। उसके बाद अम्बाराम आज फिर नगर निगम पहुंचा और वहां निगम सभापति अंसार अहमद को सारी घटना बताई। उसके बाद अंसार अहमद ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कुछ पार्षद और नेता सत्तापक्ष मनीष सेन को साथ लेकर मौके पर पहुंचे। उनकी सूचना पर BNP टीआई तारेश सोनी भी मौके पर पहुंच गए। मौके पर दलदल में फंसी तड़पती हुई गायों को देखकर गांव के कुछ लोग और पुलिसकर्मियों ने रेस्क्यू चला कर कुछ गायों को जिंदा निकाला, जिनमे से कुछ गायों की मौत हो गई। कई गायें समीप की पहाड़ी पर मरी हुई पाई गई।

आपको बता दें यह गोशाला और डेयरी फॉर्म मंडी के बड़े व्यापारी और भाजपा नेता के पुत्र वरुण अग्रवाल का होना बताया गया है। इस पूरे मामले में नगर निगम के साथ ही गोशाला प्रबंधन की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है, वहीं इस मामले में कई सवाल खड़े कर दिए है, कि गोशाला में गायों की देखरेख में लगे स्टाफ ने गायों को दलदल से क्यों नहीं निकाला? ये वो गायें है, जिन्हें निगम शहर में आवारा घूमते हुए पकड़कर यहां पहुंचता है, मरनेवाली गायों के कान पर लगे टैग से यह भी सवाल खड़ा होता है, कि कहीं गायों की मौत के पीछे बीमा लेना तो नहीं? साथ ही गोशाला के समीप इतना दलदल होना भी घटना को लेकर कई सवाल खड़े करता है। फिलहाल कई ऐसे अनुत्तरित सवाल है, जिनका जवाब यहां जिम्मेदारों के पास भी नहीं है। अब देखना यह होगा की इस घटनाक्रम के बाद पुलिस या प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।

संपादक

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