
ओवरलोड डंपर से लेकर पेवर ब्लॉक फैक्ट्री तक… जहां मिली गड़बड़ी, वहीं कार्रवाई के निर्देश
राशन की बोरियों का वजन कराया, गुणवत्ता परखी; खाद की कालाबाजारी पर भी सख्त चेतावनी
देवास/बागली। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत बागली विकासखंड में कलेक्टर ऋतु राज सिंह का औचक निरीक्षण सिर्फ सरकारी व्यवस्थाओं की पड़ताल तक सीमित नहीं रहा। निरीक्षण के दौरान जहां नियमों की अनदेखी मिली, वहां कलेक्टर ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए। ओवरलोड मुरम से भरा डंपर, बिना लेबर रजिस्ट्रेशन चल रही पेवर ब्लॉक फैक्ट्री, बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ और राशन दुकान की व्यवस्थाएं—हर मामले में कलेक्टर ने सीधे मौके पर जांच की।

रॉयल्टी नहीं मिली तो डंपर जब्त करने के निर्देश
धानीघाटी में कलेक्टर की नजर मुरम से भरे एक ओवरलोड डंपर पर पड़ी। डंपर को रुकवाकर रॉयल्टी की जांच कराई गई। रॉयल्टी नहीं मिलने पर कलेक्टर ने मौके से ही खनिज अधिकारी को डंपर जब्त करने, चालान काटने और नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।
यह कार्रवाई इस मायने में अहम रही कि कलेक्टर ने सिर्फ कागजों की जांच पर भरोसा नहीं किया, बल्कि सड़क पर वाहन रोककर उसकी वास्तविक स्थिति की पड़ताल की।
पेवर ब्लॉक फैक्ट्री में नियमों की अनदेखी
लेबर रजिस्ट्रेशन नहीं मिला, बच्चों को मशीनों के पास सुलाने पर कलेक्टर नाराज
धानीघाटी में संचालित झांझा इंटरप्राइजेस पेवर ब्लॉक निर्माण फैक्ट्री का निरीक्षण इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। जांच में फैक्ट्री का लेबर रजिस्ट्रेशन नहीं पाया गया।
लेकिन मामला सिर्फ रजिस्ट्रेशन तक सीमित नहीं था। निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि श्रमिकों के बच्चों को खतरनाक मशीनों के पास सुलाया जा रहा था। बच्चों की सुरक्षा को लेकर कलेक्टर ने नाराजगी जताई और श्रमिकों को समझाइश दी कि बच्चों को ऐसी जगहों पर न सुलाया जाए तथा उन्हें स्कूल और आंगनवाड़ी भेजा जाए।
फैक्ट्री में श्रम नियमों के उल्लंघन के साथ आसपास अतिक्रमण भी पाया गया। कलेक्टर ने एसडीएम को फैक्ट्री सील करने और अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए।
सवाल सिर्फ फैक्ट्री का नहीं, बच्चों की सुरक्षा का भी
औद्योगिक या निर्माण गतिविधियों वाले स्थानों पर बच्चों की मौजूदगी और उन्हें मशीनों के आसपास सुलाना गंभीर सुरक्षा चिंता का विषय है। कलेक्टर के निर्देशों ने इस पहलू को भी निरीक्षण के केंद्र में ला दिया।
राशन दुकान में ‘तराजू की परीक्षा’
बोरियों का वजन कराया, गुणवत्ता जांची, स्टॉक रजिस्टर भी खंगाला
ग्राम नेवरी की उचित मूल्य दुकान पर कलेक्टर ने सीधे उपभोक्ताओं से बातचीत की। सवाल था—क्या राशन के बदले कोई अतिरिक्त राशि तो नहीं ली जा रही?
ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें गेहूं, चावल और नमक नियमानुसार मिल रहा है और दुकान निर्धारित समय पर खुलती है।
इसके बाद कलेक्टर ने स्टॉक रजिस्टर की जांच की और गेहूं-चावल के उपलब्ध स्टॉक का मौके पर मिलान कराया। राशन की गुणवत्ता परखी गई। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राशन की बोरियों का वजन भी मौके पर करवाया गया, जो मानक के अनुरूप पाया गया।
हालांकि दुकान में नमक का स्टॉक अपेक्षाकृत अधिक मिला। इस पर संबंधित विक्रेता और खाद्य विभाग के कर्मचारियों से जवाब-तलब किया गया तथा नमक के लाभों की जानकारी देकर उसका वितरण बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
खाद में मनमानी की तो कार्रवाई तय
कलेक्टर की चेतावनी—किसान से तय रेट से एक रुपया भी ज्यादा लिया तो होगी कार्रवाई
नेवरी की बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी सोसायटी में कलेक्टर ने खाद और कृषि इनपुट की उपलब्धता की जानकारी ली। रजिस्टर देखकर यह पता किया गया कि सीजन में कितना उर्वरक आया, कितना किसानों को वितरित हुआ और कितना स्टॉक अभी उपलब्ध है।
सोसायटी प्रबंधक और विक्रेता को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि खाद और कीटनाशक दवाओं की बिक्री शासन द्वारा निर्धारित दरों पर ही होनी चाहिए।
कलेक्टर ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि किसान से निर्धारित दर से एक रुपया भी अधिक लेने की शिकायत मिली तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
किसानों की सुविधा के लिए परिसर में रेट लिस्ट प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश भी दिए गए।
आंगनवाड़ी से आश्रम तक… हर व्यवस्था पर नजर
धानीघाटी आंगनवाड़ी केंद्र में कलेक्टर ने बच्चों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से भोजन-नाश्ते की जानकारी ली। पोषण ट्रैकर ऐप पर बच्चों की उपस्थिति भी देखी।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि आंगनवाड़ी केंद्र समय पर खुलें और बच्चों को निर्धारित समय पर भोजन एवं नाश्ता उपलब्ध कराया जाए।
वहीं शासकीय विमुक्त जाति बालक आश्रम में कक्षाओं, किचन और साफ-सफाई की व्यवस्थाएं देखीं। बच्चों से बातचीत कर सुविधाओं की जानकारी ली गई और पूरे परिसर में स्वच्छता बेहतर रखने के निर्देश दिए गए।
बागली दौरे का संदेश साफ: निरीक्षण सिर्फ औपचारिकता नहीं
कलेक्टर ऋतु राज सिंह के इस औचक निरीक्षण में एक बात स्पष्ट दिखाई दी—सरकारी व्यवस्था की जमीनी हकीकत जानने के लिए मौके पर पहुंचकर जांच और तत्काल जवाबदेही तय करना।
एक तरफ ओवरलोड डंपर पर कार्रवाई के निर्देश, दूसरी तरफ फैक्ट्री में नियमों के उल्लंघन पर सीलिंग की कार्रवाई; वहीं राशन दुकान में वजन और गुणवत्ता की जांच तथा खाद की कीमतों को लेकर सख्त चेतावनी।
यानी बागली में कलेक्टर का दौरा सिर्फ निरीक्षण नहीं रहा, बल्कि जहां कमी मिली, वहां जिम्मेदारी तय करने का संदेश भी दे गया।
अब नजर कार्रवाई पर
फैक्ट्री सील करने, अतिक्रमण हटाने और ओवरलोड डंपर पर कार्रवाई के निर्देश के बाद अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन निर्देशों को जमीन पर कितनी तेजी से लागू करते हैं। यही इस औचक निरीक्षण की असली परीक्षा भी होगी।