सरकारी योजना में लेटलतीफी की खुली पोल…

Amaltas

तीन साल से फसल बीमा का इंतजार, अब किसानों का सब्र टूटा
150 से अधिक किसानों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जताया आक्रोश…
15 दिन में समाधान नहीं तो चक्काजाम की चेतावनी…

देवास। किसानों को प्राकृतिक आपदा से हुए फसल नुकसान की भरपाई का भरोसा देने वाली प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ही अब किसानों के लिए इंतजार और दफ्तरों के चक्कर का कारण बन गई है। कन्नौद ब्लॉक के मुहाई, भिलाई, नादौन, डाबरी और कोलारी बड़ा खेत गांवों के 150 से अधिक किसान तीन साल से अपनी फसल बीमा राशि का इंतजार कर रहे हैं। अब किसानों का सब्र टूट गया और वे सामूहिक रूप से कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। नारेबाजी करते हुए किसानों ने सामूहिक आवेदन सौंपा और जल्द बीमा क्लेम दिलाने की मांग की।
किसानों का कहना है कि उन्होंने 2023, 2024 और 2025 में बाकायदा फसल बीमा कराया, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं से फसल खराब होने के बावजूद तीनों वर्षों का क्लेम अब तक नहीं मिला। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आसपास के गांवों के किसानों को उन्हीं वर्षों की बीमा राशि मिल चुकी है, तो इन गांवों के किसानों को उनके हक की राशि से अब तक क्यों वंचित रखा गया?

तीन साल से बैंक, विभाग और कंपनी के चक्कर

किसानों के मुताबिक बीमा राशि के लिए वे बैंक, कृषि विभाग और संबंधित बीमा कंपनी के अधिकारियों के पास कई बार शिकायत कर चुके हैं। हर बार उन्हें आश्वासन मिला, लेकिन खाते में राशि नहीं पहुंची। अब किसानों का आरोप है कि सरकारी योजना की प्रक्रिया में विभागीय तालमेल की कमी और लेटलतीफी का खामियाजा सीधे किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
किसानों ने बताया कि अधिकारियों की ओर से सेटेलाइट सर्वे के आधार पर बीमा निर्धारण की बात कही गई है। उनका सवाल है कि यदि सेटेलाइट सर्वे ही आधार है तो उनके गांवों से महज करीब दो किलोमीटर दूर स्थित गांवों के किसानों को क्लेम कैसे मिल गया और उन्हीं परिस्थितियों में इन गांवों के किसानों को क्यों छोड़ दिया गया?

एक ही योजना, अलग-अलग गांवों में अलग परिणाम

मामले का सबसे गंभीर पहलू यही है कि एक ही क्षेत्र में फसल नुकसान के बाद कुछ गांवों के किसानों को बीमा राशि मिल गई, जबकि पांच गांवों के किसान तीन साल से इंतजार कर रहे हैं। इससे बीमा निर्धारण और सर्वे प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
किसानों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, सर्वे और क्लेम निर्धारण की प्रक्रिया सार्वजनिक करने तथा पात्र किसानों को लंबित बीमा राशि दिलाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है।

15 दिन का अल्टीमेटम, फिर सड़क पर उतरेंगे किसान

कलेक्टर कार्यालय पहुंचे किसानों ने साफ चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ और लंबित बीमा राशि दिलाने की ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे चक्काजाम कर आंदोलन करेंगे। किसानों के इस ऐलान से साफ है कि मामला अब केवल आवेदन और आश्वासन तक सीमित नहीं रहने वाला।

पोर्टल की गलती ने बढ़ाई ग्रामीणों की परेशानी

इसी दौरान ग्राम मोहाई के ग्रामीणों ने भी शासकीय पोर्टल पर दर्ज गांव की जानकारी में त्रुटि का मामला उठाया। ग्रामीणों के अनुसार मोहाई ग्राम पंचायत भिलाई के अंतर्गत आता है, लेकिन शासकीय पोर्टल पर इसे सतवास तहसील में अलग तरीके से प्रदर्शित किया जा रहा है। गलत जानकारी के कारण राजस्व, पंचायत और विभिन्न शासकीय योजनाओं से जुड़े कार्यों में ग्रामीणों को परेशानी हो रही है।
ग्रामीणों ने पोर्टल में दर्ज जानकारी को तत्काल दुरुस्त करने की मांग की है।

सवाल जो प्रशासन से जवाब मांगते हैं

फसल बीमा का उद्देश्य किसान को संकट के समय आर्थिक सुरक्षा देना है, लेकिन यहां तीन साल तक क्लेम का इंतजार योजना के जमीनी क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि किसान पात्र हैं तो भुगतान में इतनी देरी क्यों? यदि पात्र नहीं हैं तो उन्हें स्पष्ट कारण क्यों नहीं बताया गया? और यदि सर्वे में गलती है तो उसकी समीक्षा कौन करेगा?
अब किसानों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। 15 दिन की समयसीमा सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि प्रशासन के लिए यह परीक्षा भी है कि वह सरकारी योजना के लाभ को फाइलों और आश्वासनों से निकालकर वास्तव में किसानों के खातों तक कब पहुंचाता है।

संपादक

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