हाटपिपल्या चुनाव: कांग्रेस-भाजपा दोनों ही दलों से गूंज रही एक ही आवाज… तू गद्दार… तू गद्दार…

अब आप खुद जानिए आखिर कौन है बड़ा गद्दार…?

Rai Singh Sendhav

देवास। उपचुनाव को लेकर सियासत का पारा चढ़ चुका है। चुनावी जनसंपर्क तेज हो गया है। चुनावी सभाओं का रंग जम गया है। विकास का मुद्दा गुमनामी में खो गया है। गद्दारी का मुद्दा छाया नजर आ रहा है। देवास जिले की हाटपिपल्या विधानसभा क्षेत्र में भी यही सबकुछ नजर आ रहा है। भाजपा से यहां मनोज चौधरी प्रत्याशी हैं, जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आये हैं। चौधरी यहां से कांग्रेस के विधायक थे। वो ज्योतिरादित्य सिंधिया के खास थे। सिंधिया के साथ भाजपा में आये है। भाजपा का टिकट भी साथ लाये है। कांग्रेस से राजवीरसिंह बघेल प्रत्याशी हैं। वो पहली बार विधानसभा के चुनाव मैदान में आये है। यहां से पूर्व विधायक रहे राजेन्द्रसिंह बघेल के बेटे हैं। सोनकच्छ से 3 बार नगर पंचायत के अध्यक्ष रहे हैं।जब जब कांग्रेस से टिकट नहीं मिली तो बगावत कर निर्दलीय लड़े हैं। बगावत करने पर कांग्रेस से बाहर भी हुए हैं। चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस में फिर शामिल हुए हैं। अब कांग्रेस के टिकट से हाटपिपलिया विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी है।
प्रदेश में होने वाली सभी चुनावी सभाओं में कांग्रेस के नेता भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया और सभी 22 विधायकों को गद्दार कह रहे हैं। वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस के कमलनाथ और दिग्विजय सिंह पर तीखे प्रहार करते हुए जनता से किए गए वादों की वादाखिलाफी को लेकर कमलनाथ और दिग्विजय को गद्दार कह रहे हैं।
बात हाटपिपलिया विधानसभा क्षेत्र की करें तो यहां कांग्रेस की चुनावी सभा और जनसंपर्क में भाजपा प्रत्याशी मनोज चौधरी को गद्दार और बिकाऊ कहते हुए उन पर शब्द बाण चलाए जा रहे हैं। कहीं बिकाऊ नहीं टिकाऊ चाहिए के नारे गुंजायमान हो रहे हैं तो कहीं गद्दारों को गांव में नहीं घुसने देने की चेतावनी की तख्तियां और फ्लेक्स लगाकर टांगे गए हैं।
वही भाजपा की चुनावी सभा और जनसंपर्क के दौरान भाजपा प्रत्याशी मनोज चौधरी कांग्रेस प्रत्याशी राजवीर सिंह बघेल द्वारा सोनकच्छ नगर पंचायत में कांग्रेस प्रत्याशी के विरुद्ध निर्दलीय चुनाव लड़ने की बात याद दिलाते हुए जनता से पूछ रहे हैं कि बताओ गद्दार कौन है? मनोज चौधरी अपनी हर सभा और जनसंपर्क में कह रहे हैं कि जब भी विकास की बात लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास जाते थे तो चलो..चलो…, कहकर उन्हें टाल दिया जाता था…, मंत्री उनकी सुनते नहीं थे…, क्षेत्र में विकास के कार्य ठप पड़े थे… जनता उनसे अपेक्षाएं रख रही थी… इसलिए उन्होंने सिंधिया जी के साथ जाकर कांग्रेस छोड़ी है। जबकि सोनकच्छ नगर पंचायत चुनाव में अध्यक्ष के लिए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने वाले राजवीर सिंह बघेल जब हाटपिपलिया आते हैं तो कांग्रेस का झंडा उठाते हैं और सोनकच्छ में कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ते हैं ऐसे में बताओ कौन गद्दार…?
कुल मिलाकर इस विधानसभा चुनाव में विकास और कार्यों का मुद्दा गौण हो गया है। यहां बात सिर्फ गद्दारी और वफादारी की हो रही है। हाटपिपलिया विधानसभा क्षेत्र की जनता असमंजस में है कि इस बार आखिर चुनाव विधायकी का है…, या फिर गद्दारी और वफादारी का…? हाटपिपलिया क्षेत्र की जनता की आंखें विकास का रास्ता खोज रही हैं… किंतु यहां विकास की बात करता कोई नजर नहीं आता… यहां बात गद्दारी और वफादारी की हो रही है…, यहां बात बिकाऊ और टिकाऊ की हो रही है…।

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आम जनता में तरह-तरह की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। कुल मिलाकर हाटपिपलिया विधानसभा क्षेत्र की जनता खामोश है। बात गद्दारी और वफादारी की हो… या फिर बिकाऊ और टिकाऊ की… या फिर सड़क पर उतरने और कमलनाथ सरकार के सड़क पर आने की… अब ऐसा लगने लगा है की आम मतदाता को इन बातों से कोई लेना देना नहीं है… आम मतदाता अपने क्षेत्र में सिर्फ विकास देखना चाहता है…, जिसकी बात यहां कोई नहीं कर रहा…।

संपादक

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