करोड़ों खर्च, फिर भी सूखे नल, नल-जल योजना की जमीनी हकीकत

टंकियां बनीं, पाइप बिछे… पर घर-घर पानी अब भी सपना

जिले में नल जल योजना के बुरे हाल…

जल निगम की नल-जल योजना में ठेकेदार–अधिकारियों की लापरवाही उजागर

सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना ग्रामीणों को घर-घर शुद्ध पेयजल देने का सपना लेकर आई थी, लेकिन देवास जिले की बरोठा, नापाखेड़ी और आक्या पंचायतों में यह योजना भ्रष्ट कार्यप्रणाली, ठेकेदारों की मनमानी और जिम्मेदार अफसरों की चुप्पी का शिकार हो गई।

करोड़ों रुपए की लागत से टंकियां खड़ी कर दी गईं, पाइपलाइन बिछा दी गई, लेकिन जमीन पर हकीकत यह है कि ग्रामीण आज भी पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट- दिलीप मिश्रा

Rai Singh Sendhav

देवास। वर्ष 2022-23 में तैयार हुई योजनाएं, आज 2026 में भी सिर्फ कागजों और टेस्टिंग तक सीमित हैं। कहीं सड़क निर्माण के दौरान पाइप काट दिए गए, कहीं पाइप लाइन गहराई में नहीं डाली गई और कहीं लीकेज ने पूरी योजना को फेल कर दिया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गलतियां साफ दिखने के बावजूद विभाग सिर्फ टेस्टिंग दिखाकर ग्रामीणों को भ्रमित कर रहा है।

टंकियां तैयार, लेकिन नलों में पानी नहीं

बरोठा, नापाखेड़ी और आक्या तीनों पंचायतों में नल-जल योजना के तहत विशाल जल टंकियों का निर्माण और पाइप लाइन बिछाने का काम वर्षों पहले पूरा किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीणों को आज भी पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
कहीं महिलाएं सिर पर बर्तन ढोने को मजबूर हैं, तो कहीं बच्चे साइकिल पर ड्रम बांधकर पानी लाते नजर आ रहे हैं।

मामला-1 : बरोठा –

दो विभागों की खींचतान में दबी नल-जल योजना

सड़क बनी, पाइप कटे, विभाग भिड़ते रहे और पानी दफन हो गया। बरोठा पंचायत में जल निगम द्वारा 2-3 वर्ष पहले करोड़ों की लागत से टंकी और पाइपलाइन तैयार की गई। इसके बाद जब मुख्य सड़क का निर्माण हुआ, तो सड़क बनाने वाली कंपनी ने पानी की लाइन जगह-जगह काट दी।
उस वक्त न सड़क ठेकेदार ने जिम्मेदारी ली, न ही जल निगम के अधिकारी गंभीर हुए। ग्रामीणों के अनुसार उसी समय शिकायत की गई थी, लेकिन
• सड़क ठेकेदार कहता रहा — पाइप गहराई में नहीं डाली गई, जिम्मेदारी जल निगम की
• जल निगम कहता रहा — लाइन सड़क वालों ने काटी, वही जोड़ेंगे
इस खींचतान में कटी-फटी पाइपलाइन पर सड़क बना दी गई, और आज पानी की लाइन सड़क के नीचे दफन होकर बेकार पड़ी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पानी सप्लाई के नाम पर सिर्फ टेस्टिंग कर झूठा दावा किया जा रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि कटी-फटी लाइन से घर-घर पानी पहुंच ही नहीं सकता।

सरपंच का बयान

“गांव में अभी भी वर्षों पुरानी पंचायत योजना से पानी मिल रहा है। नल-जल योजना की लाइन सड़क निर्माण के दौरान कट गई थी। ठेकेदार और विभाग की आपसी खींचतान के कारण सुधार नहीं हुआ। अब सड़क के नीचे कटी लाइन भविष्य में बड़ी परेशानी बन सकती है।”

मामला-2 : नापाखेड़ी –

पानी के लिए साइकिल और सिर पर बर्तन

नापाखेड़ी पंचायत में नल-जल योजना की स्थिति और भी गंभीर है। टंकी तैयार, नल सूखे… महिलाएं सिर पर पानी ढोने को मजबूर है। नापाखेड़ी पंचायत में नल-जल योजना की बदहाली सबसे ज्यादा मार्मिक तस्वीर पेश करती है।
यहां ग्रामीण पानी के लिए साइकिल, ड्रम और बर्तन लेकर भटकते नजर आते हैं। महिलाएं और बच्चे 1 से 2 किलोमीटर दूर पंचायत भवन के पीछे लगे बोरिंग से पानी लाने को मजबूर हैं।
यहां भी जल निगम ने करोड़ों की टंकी और पाइपलाइन तो बिछा दी, लेकिन
• पाइप जरूरी गहराई में नहीं डाली गई
• खेतों और रास्तों से गुजरती लाइन कई जगह से टूट गई
अब विभाग टेस्टिंग के नाम पर फूल प्रेशर से पानी छोड़कर योजना सफल दिखाने की कोशिश कर रहा है, जबकि स्थायी सप्लाई को लेकर ग्रामीणों में गहरी आशंका है।

सरपंच प्रतिनिधि शिवलाल पटेल

“लाइन खेतों से गुजरने के कारण टूट-फूट हुई थी, अब सुधार किया गया है। टेस्टिंग में आखिरी छोर तक पानी पहुंचा है। एक-दो महीने में योजना चालू होने की उम्मीद है।”

ग्रामीणों का सवाल:

“टेस्टिंग में सब ठीक है,
लेकिन नियमित सप्लाई में लीकेज हुआ तो जिम्मेदार कौन होगा?”
क्या इसमें जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी या ठीकरा ठेकेदारों पर फोड़ते हुए और मेंटेनेंस के नाम पर उन्हें भी बचाने का काम जारी रहेगा?

मामला-3 : आक्या –

टंकी बनी, पर लोग निजी बोरिंग पर निर्भर

करोड़ों की योजना, लेकिन लोग आज भी निजी बोरिंग पर निर्भर हैं। आक्या पंचायत में भी नल-जल योजना का हाल अलग नहीं। यहां 2-3 साल पहले बनी टंकी और बिछी पाइपलाइन, आज लीकेज और कट-फट का शिकार है। ग्रामीणों को मजबूरी में निजी बोरिंग से पानी मांगकर काम चलाना पड़ रहा है।
उपसरपंच आरिफ पटेल ने माना कि पाइपलाइन बिछाने में गंभीरता नहीं बरती गई, जिससे आज योजना शुरू ही नहीं हो पा रही।

लीकेज बड़ी समस्या

“नल-जल योजना में बड़े ठेकेदार थे। उन्होंने अधिकारियों की भी नहीं सुनी, ग्रामीणों की सुनना तो दूर की बात थी। अब गांव में पाइपलाइन लीकेज बड़ी समस्या बन गई है।”
– समाजसेवी बाबू स्टार

करोड़ों खर्च, जवाबदेही शून्य

तीनों पंचायतों की तस्वीर एक जैसी है—

✔ टंकियां बनीं
✔ पाइप लाइन बिछी
❌ लेकिन पानी नहीं पहुंचा
सरकार के करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद योजना कागजों में सफल और जमीन पर फेल नजर आ रही है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार?

“तीनों जगह लाइन कटने की बात सही है।
रिपेयर जल्द कराया जाएगा। ठेकेदार का 10 साल का मेंटेनेंस है, वही काम करेगा। जहां पाइप गहराई में नहीं डाली गई, वहां ठेकेदारों के पेमेंट काटे जाएंगे।” योजना को एक-दो महीने में चालू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

-जेपी गनोटे, महाप्रबंधक, जल निगम

सवाल वही है—

करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी अगर ग्रामीण पानी के लिए भटक रहे हैं, तो यह सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि ठेकेदार–अधिकारी गठजोड़ की गंभीर विफलता है।

सवाल यह है —

क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी,
या नल-जल योजना सिर्फ टंकियों तक ही सीमित रह जाएगी?

संपादक

+ posts
Enable Notifications OK No thanks