देवास से करीब 4 हजार प्रवासी मजदूरों को रोजाना भेजा जा रहा उनके गंतव्य तक…

इंदौर रोड स्थित आर्गस गार्डन पर लगा यात्रियों का हुजूम…
गुना और सागर के लिए करीब डेढ़ सौ बसें रोजाना हो रही रवाना…
सामाजिक संस्थाएं इन प्रवासी मजदूरों की भोजन व्यवस्था में जुटी…
महाराष्ट्र से आकर यूपी जाने वाले हजारों मजदूरों का देवास में डेरा..

Rai Singh Sendhav
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देवास। कोरोना के कहर ने मजदूरों की मजदूरी छीन ली। महाराष्ट्र से हजारों की तादाद में मजदूरों ने पलायन किया जो आज भी निर्बाध जारी है। मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने इन मजदूरों को अपने गंतव्य तक भेजने के लिए बसों की व्यवस्था की है। मालवा क्षेत्र का देवास मजदूरों को भिजवाने का सबसे बड़ा सेंटर बनकर उभरा है। यहां इंदौर रोड पर आर्गस गार्डन पर यात्रियों का हुजूम उमड़ा रहा है। यहां से करीब 4000 यात्रियों को रोजाना गुना और सागर के लिए भेजा जा रहा है। देवास की सामाजिक संस्थाएं भी इन यात्रियों के भोजन पानी की व्यवस्था में जुटी हैं।

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आपको बता दें महाराष्ट्र से हजारों की तादाद में पलायन कर कोई पैदल तो कोई वाहनों में लिफ्ट लेकर जैसे तैसे देवास पहुंचे हैं। मदद की चेन के जरिए बड़वानी और खरगोन क्षेत्र से बसों के जरिए मजदूर देवास आ रहे हैं।  गार्डन में पूरा प्रशासनिक अमला व्यवस्था में जुटा है। नगरनिगम कमिश्नर विशाल सिंह व्यवस्था देख रहे हैं। वही जिला परिवहन अधिकारी जया वसावा नई बसों की व्यवस्था की है। करीब डेढ़ सौ बसें यहां से रोजाना प्रवासी यात्रियों को लेकर जा रही हैं।

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दूरदराज से आ रहे इन प्रवासी मजदूरों और यात्रियों के भोजन की व्यवस्था का जिम्मा देवास की कई सामाजिक संस्थाओं ने उठाया है जो दिन रात सेवा कार्य में जुटी हैं। यहां पुलिस विभाग के आला अधिकारी हो या पुलिसकर्मी सब अपने अपने स्तर पर व्यवस्था बनाने में जुटे हैं। डॉक्टरों की टीम यहां आने वाले यात्रियों का स्वास्थ्य परीक्षण भी कर रही है।

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निगम कमिश्नर विशाल सिंह ने बताया कि करीब 4000 यात्रियों को गुना और सागर भेजा गया।  करीब इतने ही यात्री रोजाना भेजे जा रहे हैं। अगर रात में भी बसें उपलब्ध होती हैं और यात्री रहते हैं तो उन्हें भेजने की व्यवस्था की जा रही है।

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जिला परिवहन अधिकारी जया वसावा के मुताबिक करीब डेढ़ सौ बसें रोजाना यात्रियों के लिए लगाई गई हैं। यहां पूरा प्रयास किया जा रहा है की आने वाला हर व्यक्ति अपने गंतव्य तक सुविधाजनक तरीके से पहुंच जाएं।

संपादक

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2 thoughts on “देवास से करीब 4 हजार प्रवासी मजदूरों को रोजाना भेजा जा रहा उनके गंतव्य तक…”

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