
देवास। पत्रकारिता की दुनिया में अपनी बेबाक कलम, खुशमिजाज, बेहतरीन व्यक्तित्व से अलग पहचान बनाने वाले देवास प्रेस क्लब के अध्यक्ष ललित शर्मा अब हमारे बीच नहीं रहे। कल सुबह झंडा वंदन के पश्चात सीने में दर्द और घबराहट के पश्चात अचानक हृदय गति के रुक जाने से उनका निधन हो गया। उनके असामयिक निधन की खबर ने पत्रकार जगत ही नहीं, बल्कि उन्हें जानने-पहचानने वाले हर व्यक्ति को गहरे सदमे में डाल दिया।
ललित शर्मा ने अपनी पत्रकारिता की शुरुआत सोनकच्छ से की थी। छोटे शहर से शुरू हुआ उनका यह सफर धीरे-धीरे देवास की पत्रकारिता में एक मुकाम तक पहुंचा। उन्होंने अपनी मेहनत, खबरों की गहरी समझ और कलम की धार से अपनी अलग पहचान बनाई। जागरण समूह से जुड़कर उन्होंने ऐसी कई खबरें सामने रखीं, जिन्होंने प्रशासन को भी हरकत में आने और कार्रवाई करने के लिए मजबूर किया। उनकी खबरों में सिर्फ सनसनी नहीं, बल्कि सवाल उठाने का साहस और व्यवस्था को आईना दिखाने का जज़्बा भी था।
ललित शर्मा केवल खबर लिखने वाले पत्रकार नहीं थे, वे कलम की ताकत को समझने वाले पत्रकार थे। उनकी लेखनी में बेबाकी थी तो व्यवहार में अपनापन। चेहरे पर हमेशा मुस्कान और बातचीत में सहजता उनकी पहचान थी। यही वजह थी कि साथी पत्रकारों से लेकर अधिकारियों और आम लोगों तक, उनके अपने रिश्ते थे।
देवास प्रेस क्लब के अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने पत्रकारों के हितों और प्रेस की गरिमा को लेकर अपनी भूमिका निभाई। उनके जाने से देवास की पत्रकारिता ने एक ऐसा साथी खो दिया है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस होगी।
आज प्रेस क्लब का वह चेहरा खामोश है, जो अक्सर पत्रकारिता की चुनौतियों के बीच साथ खड़ा दिखाई देता था। वह आवाज़, जो खबर के पीछे छिपे सच को सामने लाने का हुनर रखती थी, अब हमेशा के लिए खामोश हो गई।
ललित शर्मा का जाना सिर्फ एक पत्रकार का जाना नहीं, बल्कि पत्रकारिता की उस जीवंत रवायत का जाना है, जिसमें खबर के साथ सरोकार, कलम के साथ साहस और रिश्तों के साथ इंसानियत भी होती है।
दो बच्चों के पिता ललित शर्मा अपने पीछे परिवार के साथ पत्रकारिता जगत में ऐसी यादें छोड़ गए हैं, जिन्हें वक्त भी आसानी से धुंधला नहीं कर पाएगा।
कल दोपहर उनके निज निवास से उनका अंतिम सफर जब शुरू हुआ तो सब की चीखे निकल गई। क्या छोटे क्या बड़े क्या दोस्त क्या रिश्तेदार सबकी आंखें आंसुओं से नम थी और सब अपने अजीज को आखिरी सफर पर आखरी बार जाता हुआ देख रहे थे मगर मजबूर थे।
उनकी अंतिम यात्रा में शहर के सभी गणमान्य नागरिक, व्यापारी, राजनीतिज्ञ और पत्रकार शामिल थे
हमारी ओर से दिवंगत ललित शर्मा को विनम्र श्रद्धांजलि। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे और शोकाकुल परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दे।
ललित शर्मा नहीं रहे, लेकिन उनकी कलम की स्याही और उनकी यादें देवास की पत्रकारिता में लंबे समय तक ज़िंदा रहेंगी।
