ये कैसा लाकडाउन… जहां पूंजीपति व कालाबाजारी हो रहे है अप और गरीब व मध्यमवर्गीय व्यापारी डाउन

सोनकच्छ ( संदीप गुप्ता)। दुनिया भर के साथ-साथ भारत में फैली वैश्विक महामारी के चलते देवास जिले को रेड झोन में चिन्हित किया गया है। सर्वज्ञ है की संक्रमण की चैन को रोकने के लिए जिला लॉक डाउन है। नगर को लाकडाउन हुए भी लगभग 45 दिन से ऊपर का समय बीत चुका है। लाकडाउन के इस दौर में जहां पूंजीपति व्यापारी निरंतर अपना व्यापार करने में समर्थ है। वही अब मध्यमवर्ग व्यापारी के साथ-साथ छोटे व्यापारी दबे स्वर में अपने विरोध प्रखर करने में लगे हुए हैं।
पशु आहार, किराना दुकान, मेडिकल के अतिरिक्त सरिया सीमेंट की दुकान वाले, इलेक्ट्रॉनिक दुकान वाले, हार्डवेयर, ऑटो पार्ट्स की दुकानों के बड़े व्यापारी सरलता के साथ अपने व्यापार का संचालन करते दिखाई दे रहे हैं। जिसके चलते निम्न वर्ग के (छोटे) व्यापारी जिनमें हाट बाजार करने वाले, सिलाई वाले, सैलून वाले, पंचर पकाने वाले, हाथ ठेले पर कटलरी रुमाल नैपकिन बेचने वाले, चाय नाश्ते की दुकानें, कपड़ा व्यापारी, स्टेशनरी का व्यवसाय करने वाले आदि व्यापारियों में खासी नाराजगी भी देखने को मिल रही है। 
कई छोटे व्यापारियों द्वारा मीडिया से अपना दर्द साझा कर कहा गया कि लॉकडाउन में जहां नियत समय अवधि में किराना मेडिकल एवं पशु आहार की दुकानें ही खुलना चाहिए वही अन्य कई बड़े व्यापारी भी अपना व्यापार प्रशासन की आंखों में धूल झोंक कर संचालित कर रहे हैं फिर सारे कानून हम मध्यमवर्गीय व निम्न वर्ग व्यापारियों के लिए ही क्यों…?

Rai Singh Sendhav

लाक डाउन में कालाबाजारी – 
नगर में जहां प्रशासन के साथ-साथ कई समाजसेवी संगठन इन दिनों जरूरतमंदों को भोजन व राशन उपलब्ध करा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ मौकापरस्त कालाबाजारी कर अपना उल्लू सीधा करने में लगे हैं।
सिगरेट, पाउच, गुटखा, सुपारी, बीड़ी बंडल, शराब, अन्य मादक पदार्थों के साथ साथ आवश्यक चीजों पर भी कालाबाजारी जोरों पर है। साथ ही खाद्यान्न सामग्री पर भी मूल्य वृद्धि कर कालाबाजारी की जा रही है।

एक नजर कालाबाजारी पर – 
380 रू मूल्य की सीमेंट बोरी 400 से 425 रु तक बेची जा रही है।
4000 रु मूल्य की बालू रेट ट्राली सीधे 7000 रू में बेची जा रही है।
प्याज की फसल आ चुकी है इसे रखने के लिए कृषकों को जाली एग्जास्ट फैन के अतिरिक्त जल मोटरों के रिपेयरिंग पार्ट्स की आवश्यकता पड़ रही है। इनमें भी कालाबाजारी जोरों पर है।
10 रू की नमक की थैली सीधे 15 से 20 रू में बेची जा रही है।
5 रू मूल्य की प्याज रखने की कट्टिया, किसानों को 10 रू में उपलब्ध हो रही है।

समानता की नजर से देखे प्रशासन – 
छोटे व्यापारियों में जन चर्चा है कि पूंजीपति व्यापारियों के साथ साथ मध्यम वर्गीय और निम्न वर्ग के व्यापारियों को भी प्रशासन को समानता की नजर से देखना चाहिए। नियमानुसार तय समय के अंतर्गत किराना, पशु आहार व मेडिकल  को छोड़कर या तो अन्य व्यवसायियों को व्यापार की छूट ना दि जाए व उल्लंघन करने पर कड़ी कार्यवाही की जाना चाहिए अन्यथा पूंजीपति व्यापारियों के साथ-साथ निम्न वर्ग के छोटे व्यापारियों को भी व्यापार की छूट प्रदान की जाना चाहिए।

इस संदर्भ में आपके द्वारा अवगत कराया गया है। कालाबाजारी की शिकायतें मिलने पर नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।
अंकिता जैन
सोनकच्छ एसडीएम

संपादक

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1 thought on “ये कैसा लाकडाउन… जहां पूंजीपति व कालाबाजारी हो रहे है अप और गरीब व मध्यमवर्गीय व्यापारी डाउन”

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