बच्चों की बगिया में हुनर के बीज

स्कूल में बच्चे सीख रहे हैं खेती किसानी…

स्कूल प्रांगण में बनाएं छोटे-छोटे के खेत…

किसी ने गेहूं बोए, तो किसी ने उगाई सब्जियां

देवास। बच्चों की बगिया में खुशियों के रंग के साथ हुनर के ना सिर्फ बीज बोए बल्कि खेती किसानी का तजुर्बा भी नन्हे-मुन्ने बच्चों ने हासिल किया। स्कूल परिसर में ही छोटे-छोटे दर्जनों खेतों ने आकर ले लिया। जहां गेहूं आलू, प्याज, पालक, सरसों और राई जैसी फसलों के बीज बोए गए। जी हां हम बात कर रहे हैं शहर के आलोट पाएगा स्कूल के उन बच्चों की जो यहां के आवासीय प्रशिक्षण केंद्र में रह कर शिक्षा के साथ रोजी रोटी के हुनर सीख रहे हैं।

Rai Singh Sendhav

आपको बता दें शहर के आलोट पाएगा स्कूल में आवासीय प्रशिक्षण केंद्र चल रहा है। जहां उन बच्चों को रखा जाता है जो समाज की मुख्यधारा से कटे हुए हैं। स्कूल आने के पहले इन बच्चों में से कुछ भीख मांगते थे तो कुछ पन्नी एवं अटाला बिनकर कुछ रुपए अपनी मेहनत का कमाते थे।

इन बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए यहां ब्रिज कोर्स चलाया जाता है जिसमें बच्चों की रुचि के अनुरूप शिक्षण के साथ उन्हें विभिन्न विधाओं से परिचित कराया जाता है।

स्कूल आने के बाद इन बच्चों में कोई चित्रकारी में मशगूल हो गया… तो कोई खेलकूद में… अब यहां बच्चों को खेती का हुनर सिखाने के लिए छोटी-छोटी क्यारियों के रूप में खेत बनाए गए। इन नन्हे मुन्ने बच्चों ने ही अपने अपने खेत में खुदाई और गुड़ाई कर खेत तैयार किये।

कुछ बच्चों के ग्रुप ने अपने अपने खेतों में अलग अलग फसलें बोई है। इतना ही नहीं अपने अपने खेत की देख रेख के लिए भी बच्चे उतने ही गंभीर हैं, जितना की एक उन्नत किसान अपने खेतों के लिए होता है।
यह बच्चे जो आवासीय केंद्र में रह रहे हैं इनमें नेमावर, खातेगांव, गढ़खजुरिया और रतलाम के बच्चे हैं। इन बच्चों को पढ़ाई के बाद अतिरिक्त समय में रचनात्मक गतिविधियों में लगाया जाता है जहां बच्चे अपनी रुचि के अनुरूप कार्य करते हैं। यहां रह कर यह बच्चे अब बेहद खुश हैं और बेहतर भविष्य के सपने संजोने ने लगे हैं।

संपादक

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1 thought on “बच्चों की बगिया में हुनर के बीज”

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