शास्त्रो में पार्थिव पूजन का विशेष महत्व है-प.मुरलीधर शर्मा

पार्थिव शिवलिंग के निर्माण के साथ हो रहा नित्य श्रंगार, पूजन अभिषेक

सोमेश उपाध्याय

Rai Singh Sendhav

बागली। सावन माह में जहां शिवालयों में भक्तों की भीड़ भोलेनाथ की उपासना में कर रही है। वहीं मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान चल रहे हैं।इसी तारतम्य में नगर के विद्वान आचार्य प.मुरलीधर शर्मा खेड़ीघाट स्थित नर्मदा तट पर महामंडलेश्वर बालकदास जी त्यागी के सानिध्य में बागली के 11 ब्राह्मण बटुकों व यजमानो की उपस्थिति में प्रतिदिन शिव रुद्राभिषेक व पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर आकर्षक श्रंगार करते है।प.शर्मा ने बताया कि पार्थिव पूजन से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।

शिवजी की अराधना के लिए पार्थिव पूजन सभी लोग कर सकते हैं, फिर चाहे वह पुरुष हो या फिर महिला। यह सभी जानते हैं कि शिव कल्याणकारी हैं। जो पार्थिव शिवलिंग बनाकर विधिवत पूजन अर्चना करता है, वह दस हजार कल्प तक स्वर्ग में निवास करता है। शिवपुराण में लिखा है कि पार्थिव पूजन सभी दुःखों को दूर करके सभी मनोकामनाएं पूर्ण करता है। यदि प्रति दिन पार्थिव पूजन किया जाए तो इस लोक तथा परलोक में भी अखण्ड शिव भक्ति मिलती है।शर्मा ने कहा किशास्त्रों के अनुसार पार्थिव शिवलिंग का पूजन करने से करोड़ों यज्ञों के बराबर फल प्राप्त होता है। भगवान शिव सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता हैं और उनकी साधना का यह सबसे सरल-सहज और पावन माध्यम है। जिसके पास कुछ भी नहीं वह शुद्ध मिट्टी का पार्थिव शिवलिंग बनाकर महज बेल पत्र, शमी पत्र आदि अर्पित कर उनकी कृपा प्राप्त कर सकता है।
रोग से मुक्ति के लिए कर सकते हैं इन मंत्रों का जाप: पार्थिव शिवलिंग की पूजा के समय महामृत्युंजय और दुर्गा सप्तशती के मंत्रों का कर सकते हैं। माना जाता है कि पार्थिव शिवलिंग के सामने महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से रोगों से मुक्ति मिल जाती है।
शिवलिंग निर्माण के बाद रूद्राभिषेक आरती पूजन संपन्न कराया जा रहा है। आरती पूजन के बाद विधि विधान से शिवलिंग माँ नर्मदा में विसर्जित किए जा रहे हैं।

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