आज भी नही मिल पा रहा बेटियों को बेटे के समान अधिकार

अनिल उपाध्याय

Rai Singh Sendhav

खातेगांव। सरकार बेटियों के लिए लाख योजनाएं चलाएं उसे लाडली लक्ष्मी बनाएं या फिर उन्हें बेटों के बराबर दर्जा देते हुए 50% आरक्षण की बात कहें लेकिन 70 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज भी बेटियों को बेटों के समान परिवार या समाज में वह नहीं मिल पाया जो मिलना था !
आज भी सास यह चाहती है कि उसको उसकी बहू को बेटा हो बेटी होने पर सास बहू से मुंह मोड़ लेती हे! ऐसा ही एक मामला गत दिनों खातेगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ महिला स्वास्थ्य कर्मचारियों के सामने आया हुआ यह कि गर्भवती होने पर पिपलानी की पिंकी को प्रसूति के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया! महिला ने बच्चे को जन्मदिन लेकिन वह बच्चा खामोश था उसके रोने की आवाज नहीं आने पर प्रसूति महिला ने अपनी पीड़ा महिला कर्मचारी को बताई तब यह बात सामने आई कि सास की इच्छा थी कि उसकी बहू को बेटा हो ना की बेटी लेकिन बहु को बेटी होने पर सांस ने उससे मुंह मोड़ लिया हालांकि कुछ समय बाद बेटी चल बसी लेकिन इस बार बहु को बेटा हुआ जिस के रोने की आवाज नहीं आने पर महिला के रो रो कर बुरा हाल था वह कह रही थी बेटा मेरा सही सलामत रहे ताकि मेरी सास मुझसे बेटे के खातिर बोलचाल शुरू कर दे यहा संसाधन नहीं होने से उसे परिजन इलाज के लिए इंदौर ले गए!

स्वास्थ्य महिला कर्मचारियों के सामने दूसरा मामला भी कुछ ऐसा ही आया पुरोनी की रिना को पहले से ही दो बेटी है !गर्भवती होने पर परिजनों ने उसे अस्पताल में भर्ती किया और भगवान से मान मन्नत की कि इस बार बेटा देना लेकिन विधाता के लिखे लेख को कौन मिटा सकता है!
पहले से ही उसे दो बच्चे थे वह चाहती कि ऑपरेशन करा ले लेकिन परिवार की मर्जी के खिलाफ आखिर बहु कैसे जा सकती थी ! उसे अस्पताल में भर्ती किया गया लेकिन यह क्या हुआ यह भी तो चमत्कारी था आखिर उसे क्या माना जाए बेटा बेटी परिजन उसे इलाज के लिए यहां से लेकर गए या मौजूद स्वास्थ्य महिला कर्मचारी भी इस अचंभित चमत्कार को देखकर दंग रह गई!

तीसरा मामला बबीता का आया बबीता को पहले से ही दो लड़के और एक लड़की है गर्भवती होने पर परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे बबीता को प्रसूति हुई प्रसूति के बाद बबीता ने बच्ची को जन्म दिया लेकिन यह क्या बच्ची का एक हाथ नहीं बबीता का रो रो कर बुरा हाल हे, महिला स्वास्थ्य कर्मचारियों ने बड़ी मुश्किल से बबीता को समझाया और कहा कि भगवान को जो मंजूर है वही हुआ इसे क्या कहें कुदरत की कोई कमी या अचंभा 3 दिन तक सरकारी अस्पताल मे लगातार हुए इन चमत्कारों से अस्पताल की मौजूद महिला स्वास्थ्य कर्मचारी भी दंग रह गई! क्या भगवान तेरा भी चमत्कार निराला
उन्होंने कहा कि उनकी 30 साल की सेवा में आज तक इस प्रकार के प्रकरण सामने नहीं आए वह भी लगातार तीन दिन तक क्योंकि वह भी महिला है और महिला के दर्द को बखूबी से समझती है

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