भारतीय संस्कृति का परिचायक है ‘होली’ – मुकुंदमुनि जी

जटाशंकर तीर्थ पर भी मनाया गया फागोत्सव, रंगपंचमी पर मनेगा मुख्य उत्सव

Amaltas

सोमेश उपाध्याय.
बागली। गुरुवार को जहां पूरे नगर में होलिकोत्सव की धूम रही। नगर में गढ़ीचौक, इनाणी चौराहा, टाकीज चौराहा, मुख्यबाजार स्थित महाँकाल चौक, शिवाजी चौराहा, इमली चौराहा, पुरानी तहसील समेत दर्जनभर से अधिक स्थानों पर होलिका दहन किया गया। तो वही प्रसिद्ध जटाशंकर तीर्थ पर भी भगवान जटाशंकर के दरबार मे भी यह पर्व बड़े उल्लास से मनाया गया।

सर्वप्रथम भगवान जटाशंकर व ब्रह्मलीन सन्त श्री केशवदास जी त्यागी महाराज की समाधि स्थल पर रंग डाल कर फागउत्सव आरम्भ किया गया। इस दौरान तीर्थ महंत श्री बद्रीदास जी महाराज ने कहा की हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहाँ पर मनाये जाने वाले सभी त्योहार समाज में मानवीय गुणों को स्थापित करके लोगों में प्रेम, एकता एवं सद्भावना को बढ़ाते हैं, राग-रंग का यह लोकप्रिय पर्व बसंत का संदेशवाहक भी है।इस दौरान नवयुवको द्वारा फाग गीत गाए गए।जटाशंकर सेवा समिति के सदस्यों ने बताया की तीर्थ परिसर मे ब्रह्मलीन गुरुदेव फलाहारी बाबा द्वारा स्थापित विभिन्न परम्परानुसार होलिकाउत्सव की इस बेला मे रंगपंचमी पर भव्य होली होली पर्व मनाया जावेगा। वही स्थानीय वागयोग चेतना पीठम पर भी मुकुंदमुनि पं श्री रामाधार जी द्विवेदी ने कहा कि होली का त्योहार मनाना तभी सार्थक होगा जबकि हम इसके वास्तविक महत्व को समझकर उसके अनुसार आचरण करें। इसलिए वर्तमान परिवेश में जरूरत है कि इस पवित्र त्योहार पर आडम्बरता की बजाय इसके पीछे छुपे हुए संस्कारों और जीवन मूल्यों को अहमियत दी जाए तभी व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र सभी का कल्याण होगा। पीठम पर साहित्याचार्य प.ॐ प्रकाश शर्मा,पं मुरलीधर शर्मा, प.कनिष्क द्विवेदी, पं चंद्रशेखर जोशी, पं मुकेश शर्मा की उपस्थिति मे पं मुकेश शर्मा द्वारा भगवान वागेश्वर का रंगों से आकर्षक श्रंगार किया गया। इसी के साथ शुक्रवार को नगर के विभिन्न शोक संतप्त परिवारों में विभिन्न समाजिक गेर व जनमानस द्वारा रंग डाला गया। पूरे क्षेत्र मे मुख्य होली उत्सव रंगपंचमी पर मनाया जाता है।

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