स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही पर भड़के कलेक्टर

देवास में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत उजागर, 18 पर कार्रवाई, एक निलंबित

दिलीप मिश्रा
देवास। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में गंभीर लापरवाही का बड़ा खुलासा उस वक्त हुआ, जब कलेक्टर ऋतुराज सिंह की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक में आंकड़ों और जमीनी सच्चाई के बीच भारी अंतर सामने आया। नियमित कार्यों में कोताही, गर्भवती महिलाओं और नवजातों की अनदेखी, योजनाओं के क्रियान्वयन में सुस्ती और मॉनिटरिंग की कमजोर कड़ी ने प्रशासन को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया।

Rai Singh Sendhav

18 अधिकारियों-कर्मचारियों पर गिरी गाज

बैठक में सामने आई लापरवाहियों के बाद कलेक्टर श्री सिंह ने स्वास्थ्य विभाग के 18 चिकित्सक, अधिकारी एवं कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। इनमें—
• 1 अधिकारी निलंबित,
• 5 की वेतनवृद्धि रोकी गई,
• 3 पर विभागीय जांच,
• 7 कर्मचारियों का वेतन काटा गया,
• 2 को शोकॉज नोटिस जारी करने के आदेश शामिल हैं।
कलेक्टर ने दो टूक कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं सरकार की प्राथमिकता हैं और इसमें लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

एएनसी रजिस्ट्रेशन में फिसड्डी जिला

समीक्षा में खुलासा हुआ कि जिले में एएनसी (एंटी नेटल केयर) रजिस्ट्रेशन की प्रगति मात्र 66.04 प्रतिशत है, जबकि यह स्वास्थ्य विभाग का नियमित और अनिवार्य कार्य है। इस पर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी जताई।
अनमोल पोर्टल पर एएनसी पंजीयन में लापरवाही पाए जाने पर एएनएम रीना साकते और दीपिका वर्मा का 7 दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए गए। वहीं शहरी क्षेत्र में मॉनिटरिंग में लापरवाही पर बीईई सुखदेव रावत की दो वेतनवृद्धि रोकने का आदेश दिया गया।

सोनकच्छ बना लापरवाही का केंद्र

बैठक में सोनकच्छ विकासखंड की स्थिति सबसे ज्यादा निराशाजनक पाई गई। इस पर कलेक्टर श्री सिंह ने नाराजगी जाहिर करते हुए—
• सोनकच्छ बीपीएम दीपक चौहान का 10 दिन का वेतन काटने,
• सोनकच्छ बीएमओ राकेश कुमार की दो वेतनवृद्धि रोकने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने सख्त लहजे में कहा कि यदि सुधार नहीं हुआ तो आगे और कठोर कदम उठाए जाएंगे।

एनीमिक गर्भवती महिलाओं को राहत, मिलेगा प्रोत्साहन

बैठक में एक सकारात्मक निर्णय भी लिया गया। एनीमिक गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव को प्रोत्साहित करने के लिए शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में ब्लड ट्रांसफ्यूजन कराने पर 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह योजना दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी।
कलेक्टर ने कहा कि इससे गर्भवती महिलाओं को आर्थिक संबल मिलेगा और वे अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक होंगी।

बिना अनुमति छुट्टी पर नहीं जाएंगे बीएमओ

स्वास्थ्य विभाग में अनुशासनहीनता पर कड़ा संदेश देते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि कलेक्टर की अनुमति के बिना कोई भी बीएमओ अवकाश पर नहीं जाएगा। बिना स्वीकृति के अनुपस्थित पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यालय पर उपस्थित नहीं रहने और समय पर मरीजों को सेवा नहीं देने पर सोनकच्छ के डॉ. आदर्श ननेरिया और डॉ. वर्षा राय को शोकॉज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।

मातृ एवं बाल मृत्यु मामलों की गहन समीक्षा

कलेक्टर श्री सिंह ने मातृ मृत्यु और बाल मृत्यु प्रकरणों की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा की और परिजनों से बातचीत कर कारण जाने।
• प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पानी गांव की डॉ. मेघा कदम की एक वेतनवृद्धि रोकी गई।
• कन्नौद में एनीमिक महिला का उपचार नहीं करने पर बीएमओ लोकेश मीणा, ड्यूटी डॉक्टर और जिला चिकित्सालय की डॉ. लक्ष्मी जायसवाल पर विभागीय जांच के निर्देश दिए गए।
• ड्यूटी नर्स की दो वेतनवृद्धि रोकने के आदेश दिए गए।
टीबी कार्यक्रम में भी कार्रवाई
नेशनल ट्यूबरकुलोसिस प्रोग्राम की समीक्षा में जहां टोंकखुर्द को शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने पर सराहना मिली, वहीं सोनकच्छ में खराब प्रदर्शन पर एसटीएलएस शर्मिला राठौर को निलंबित करने के निर्देश दिए गए।

सोनकच्छ क्यों बना सबसे कमजोर कड़ी?

जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में सोनकच्छ विकासखंड बार-बार कलेक्टर की नाराजगी का केंद्र बना। एएनसी रजिस्ट्रेशन, टीबी नियंत्रण, गृह आधारित नवजात देखभाल से लेकर मॉनिटरिंग तक लगभग हर पैमाने पर सोनकच्छ की स्थिति बेहद कमजोर पाई गई।
• एएनसी कार्य में बेहद खराब प्रगति
• टीबी कार्यक्रम में लक्ष्य से काफी पीछे
• नवजात शिशु देखभाल में गंभीर लापरवाही
• डॉक्टरों का मुख्यालय पर उपस्थित नहीं रहना
इन्हीं कारणों से सोनकच्छ बीएमओ राकेश कुमार की दो वेतनवृद्धि रोकी गई, बीपीएम दीपक चौहान का वेतन काटा गया और टीबी कार्यक्रम की एसटीएलएस शर्मिला राठौर को निलंबित किया गया। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सोनकच्छ में सुधार नहीं हुआ तो आगे और कड़ी कार्रवाई तय है।

आंकड़ों ने खोली सिस्टम की पोल

समीक्षा बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए। जिले में एएनसी रजिस्ट्रेशन मात्र 66.04 प्रतिशत रहना यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर निगरानी और जवाबदेही दोनों कमजोर हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि गर्भावस्था के दौरान समय पर पंजीयन और चार अनिवार्य जांच सुनिश्चित न हों, तो मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाना संभव नहीं है। इसी कारण कलेक्टर ने एएनसी को लेकर शून्य सहनशीलता की नीति अपनाने के संकेत दिए।

कार्रवाई क्यों जरूरी थी?

स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही केवल फाइलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका सीधा असर गर्भवती महिलाओं, नवजात बच्चों और गंभीर रोगियों पर पड़ा।
• समय पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन नहीं
• बिना हाई रिस्क के रेफरल
• मातृ मृत्यु प्रकरणों में लापरवाही
• एनीमिक गर्भवती का समुचित इलाज नहीं
इन्हीं गंभीर चूकों के चलते कलेक्टर ने सख्त प्रशासनिक संदेश दिया कि स्वास्थ्य सेवाएं केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सीधे जीवन से जुड़ा दायित्व हैं।

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