
टाइम्स एमपी की खबर का असर
देवास/बागली। बागली तहसील की ग्राम पंचायत इकलेरा में करोड़ों की नल-जल योजना की विफलता को लेकर टाइम्स एमपी द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित खबर का त्वरित असर देखने को मिला। खबर प्रकाशित होने के महज एक दिन बाद ही प्रशासन हरकत में आया और गांव में नल-जल योजना से पानी की सप्लाई शुरू कर दी गई।
खबर के माध्यम से उजागर हुई विभागीय लापरवाही और ग्रामीणों की गंभीर पेयजल समस्या के बाद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। इसके बाद वैकल्पिक व्यवस्था के तहत टंकी में पानी भरवाया गया और लंबे समय से सूखे पड़े नलों से आखिरकार पानी बहता नजर आया।
वर्षों बाद नलों से टपका पानी
गौरतलब है कि इकलेरा में लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से बनी पानी की टंकी और घर-घर लगाए गए नल वर्षों से शोपीस बने हुए थे। ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरस रहे थे, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में योजना चालू बताई जा रही थी। टाइम्स एमपी ने इस विरोधाभास को सामने लाकर जिम्मेदारों की उदासीनता को उजागर किया।
ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
पानी चालू होने के बाद ग्रामीणों में खुशी और राहत का माहौल है। महिलाओं और बुजुर्गों ने कहा कि मीडिया में खबर आने के बाद ही उनकी समस्या सुनी गई। हालांकि ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यह केवल अस्थायी समाधान न हो, बल्कि स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में फिर से पानी के लिए संघर्ष न करना पड़े।
स्थायी समाधान की मांग बरकरार
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक गांव को स्थायी रूप से नर्मदा लाइन से नहीं जोड़ा जाता और योजना का विधिवत हैंडओवर पंचायत को नहीं होता, तब तक समस्या पूरी तरह खत्म नहीं मानी जा सकती। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि फिर से लापरवाही हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
मीडिया की ताकत साबित
इकलेरा की यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि जिम्मेदार और जनहितकारी पत्रकारिता किस तरह जनता की आवाज बनकर प्रशासन को जगाने का काम करती है। टाइम्स एमपी की खबर ने न सिर्फ सूखी नल-जल योजना में पानी पहुंचाया, बल्कि अधिकारियों को जवाबदेह भी बनाया।

