इकलेरा में दम तोड़ती करोड़ों की नल-जल योजना…

बागली तहसील की ग्राम पंचायत इकलेरा में पानी के बिना नल

जिम्मेदारों की उदासीनता उजागर

देवास/बागली। ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई केंद्र एवं राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी नल जल योजना बागली तहसील की ग्राम पंचायत इकलेरा में पूरी तरह से फेल होती नजर आ रही है। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई पानी की टंकी, बिछाई गई पाइपलाइन और घर-घर लगाए गए नल आज केवल सरकारी दावों की पोल खोलते दिखाई दे रहे हैं। हालात यह हैं कि नलों से आज तक एक बूंद पानी नहीं टपका, जबकि ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं।

Rai Singh Sendhav

एक करोड़ की टंकी, लेकिन पानी शून्य

पीएचई विभाग द्वारा ग्राम इकलेरा में लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से विशाल पानी की टंकी का निर्माण कराया गया। इसके साथ ही करोड़ों रुपये खर्च कर गांव के हर घर तक नल कनेक्शन पहुंचा दिए गए। योजना का उद्देश्य था कि ग्रामीणों को उनके घरों में ही पीने का पानी उपलब्ध हो सके, लेकिन वास्तविकता इससे ठीक उलट है।
वर्ष 2023 में टंकी का निर्माण पूर्ण हो गया था, परंतु आज 2026 में भी यह टंकी पानी के अभाव में शोपीस बनी हुई है।

पानी नहीं, सिर्फ दिखावा

ग्रामीणों का आरोप है कि टंकी बनने के बाद शुरुआती दो-तीन महीनों तक कहीं दूर से पानी मंगाकर टंकी भरी गई, ताकि कागजों में योजना चालू दिखाई जा सके। कुछ समय के लिए दिखावटी जलप्रदाय किया गया, लेकिन उसके बाद व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। इसके बाद न तो पानी आया और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी ने पलटकर गांव की सुध ली।

जलस्तर 1000 फीट से नीचे, फिर भी योजना लागू

इकलेरा गांव में भूजल स्तर 1000 फीट से भी नीचे चला गया है। सरपंच सहित ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले ही पीएचई विभाग के अधिकारियों को आगाह किया था कि गांव में पानी की उपलब्धता बेहद कम है और बोरवेल आधारित योजना यहां सफल नहीं होगी।
इसके बावजूद अधिकारियों ने ग्रामीणों को नर्मदा लाइन से पानी लाने के सपने दिखाए, लेकिन वह सपना आज तक हकीकत नहीं बन सका।

नर्मदा लाइन पास से गुजर रही,

गांव तक नहीं पहुंची

हैरानी की बात यह है कि गांव से महज एक किलोमीटर की दूरी पर नर्मदा की मुख्य पाइपलाइन गुजर रही है, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी कोई जिम्मेदार अधिकारी इस लाइन को गांव तक नहीं जोड़ सका। ग्रामीणों का कहना है कि अगर शुरुआत में ही नर्मदा लाइन से जोड़ दिया जाता, तो आज यह स्थिति नहीं बनती।

जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या पर बागली विधायक ने भी गांव वालों की चिंता नहीं की। कई बार शिकायतें और ज्ञापन देने के बावजूद न तो निरीक्षण हुआ और न ही कोई ठोस पहल की गई। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

हैंडओवर भी नहीं हुई योजना

सरपंच के अनुसार, अब तक नल जल योजना की हैंडओवर प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई है। विभागीय लापरवाही के चलते पंचायत को न तो व्यवस्था सौंपा गया और न ही उसके संचालन का कोई स्पष्ट रोडमैप दिया गया।

कनेक्शन के नाम पर वसूली, पानी नदारद

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि नल कनेक्शन के नाम पर प्रत्येक परिवार से करीब एक-एक हजार रुपये लिए गए, लेकिन बदले में आज तक पानी उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे गरीब और मध्यम वर्गीय ग्रामीण खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

सरकारी दावों की खुली पोल

इकलेरा पंचायत की स्थिति पीएचई विभाग और नल जल योजना के दावों की सच्चाई उजागर करती है। सरकार गांव-गांव और घर-घर नल से पानी पहुंचाने के दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि करोड़ों खर्च होने के बावजूद ग्रामीणों को एक बूंद पानी नसीब नहीं हो रहा।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने मांग की है कि
– मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए,
– जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो,
– गांव को तत्काल नर्मदा लाइन से जोड़ा जाए,
– और जब तक स्थायी समाधान न हो, तब तक वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
अब देखना यह है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या को कब गंभीरता से लेते हैं, या फिर इकलेरा के नल ऐसे ही सूखे रहेंगे और ग्रामीण पानी के लिए संघर्ष करते रहेंगे।

क्या कहते है जिम्मेदार

इस मामले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री अमित सिंह का कहना है कि शुरुआती दौर में कराए गए बोरिंग में पानी था, जो बाद में नीचे चला गया। हमने वहां 4 बोरिंग करवाए, किंतु सफलता नहीं मिली। योजना अभी पंचायत को हैंड ओवर नहीं हुई है। हम जल्दी ही भोपाल से पानी जांचने वाली टीम बुला रहे है, वहां और भी बोर कराएंगे। जल्दी वहां टीम भेजकर कुछ वैकल्पिक व्यवस्था करवाते है। नर्मदा लाइन से जोड़ने के लिए शासन को प्रस्ताव भी भेजेंगे।

संपादक

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