विषमता में एकता का प्रबंधन सिखाता है महादेव का परिवार-साध्वी प्रज्ञा जी

शंकर मन्दिर पर हुई धर्म सभा,साध्वीजी का किया अभिनन्दन

सोमेश उपाध्याय

Rai Singh Sendhav

बागली। संसार में दाम्पत्य जीवन के बारे में अगर सीखना है तो शिव से सीखें। शिव जैसा गृहस्थ कोई नहीं और शिव जैसा विरक्त भी संसार मे दूजा नही है। यह उद्गार भोपाल से पधारी कागशीला पीठाधीश्वर महन्त साध्वी प्रज्ञा जी भारती ने शिव शंकर मन्दिर में आयोजित धर्म सभा मे व्यक्त किए।साध्वी जी ने कहा कि शिव पूजन से हमको शिक्षा, जीने की प्रेरणा मिलती है। शिव परिवार में सबसे छोटा मूषक है जो गणेश का वाहन है जबकि गणपति खुद विशालकाय। शंकर के गले, माथे, कमर और हाथों में सांप है और एक सांप कई चूहों को खा सकता है लेकिन यहां एक चूहा कई सांपों के बीच सुरक्षित है। सांप चूहे को खाता है शेर गाय-बैल को देखते ही खा जाता है। पार्वती जी का वाहन शेर और शंकर का वाहन नंदी बैल। ये जन्मजात शत्रु एक जगह रहते हैं लेकिन आपस में कोई बैर नहीं करते।वही कार्तिकेय का वाहन मयूर है,और उसी परिवार में नाग भी रहता है। इसलिए शिव यह प्रेरणा देते हैं कि जीवन ऐसा होना चाहिए। केवल जलाभिषेक और हर-हर महादेव के जयकारे लगाने से कुछ नहीं होने वाला, बल्कि शिव के स्वरुप से हमें शिक्षा लेनी चाहिए। आज के प्रबंधन से जोडक़र बताते हुए कहा की शिव परिवार का प्रत्येक सदस्य कुछ ना कुछ संदेश देता है और सिखाता है कि जीवन को कैसे संतुलित जिया जाए।इस दौरान ओम महाशक्ति ग्रुप के संयोजक विपिन शिवहरे द्वारा साध्वी जी का पुष्पमाला व श्रीफल भेंट कर अभिनन्दन किया गया।इस अवसर पर अधिवक्ता देवेंद्रगिरी गोस्वामी,सोमेश उपाध्याय आदि ने भी सम्बोधित किया।सभा मे महेश गोस्वामी,प्रताप सिंह डाबी,शांतिलाल पाटीदार,राधेश्याम पाटीदार,अम्बाराम पाटिदार,जितेंद्र चावड़ा,श्रीमती गीता चौधरी,शिला चावड़ा,आशीष गोस्वामी, आदि उपस्थित थे स्वागत उद्बोधन राजेंद्रगिरी गोस्वामी ने दिया।संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता प्रवीण चौधरी ने किया व आभार पुजारी रमेशगिरी गोस्वामी ने माना!

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