लोगो की अटूट आस्था का केंद्र है रियासतकालीन शंकर मन्दिर

प्रति सोमवार निकलती है भोलेनाथ की सवारी

बागली (सोमेश उपाध्याय)। सावन माह में भगवान शिव के प्रति लोगों की अटूट आस्था का केंद्र तालाब की पाल पर स्थित नगर का रियासतकालीन प्राचीन शंकर मन्दिर। यहां पूरे सावन माह दर्शन-पूजन के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है। सोमवार को यहां जलाभिषेक का विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ के दर्शन मात्र से ही सारे विकार दूर हो जाते हैं। मांगी गई हर मुराद पूरी हो जाती है।

Rai Singh Sendhav

मान्यतानुसार यह मंदिर रियासतकालीन है।अतः प्रति सोमवार भगवान कि सवारी भी निकलती है,जो मन्दिर से प्रारम्भ हो कर कालीसिन्ध के तट पर पहुचती है जहाँ पूजन-अर्चन व आरती के बाद नगर भृमण होता है,भृमण के दौरान प्रमुख चौराहो पर पुरुषों द्वारा पारंपरिक डांडिया भी खेला जाता है।
मन्दिर की देख-रेख कई पीढ़ियों से नगर का गोस्वामी परिवार कर रहा है।वर्तमान में परिवार के भगवानगिरी गोस्वामी,ओंकारगिरी गोस्वामी, रामेशगिरी गोस्वामी एव.मोहनगिरी गोस्वामी क्रमशः मन्दिर की व्यवस्था देखते है।इस वर्ष मन्दिर की व्यवस्था रमेशगिरी गोस्वामी व उनके पुत्र देवेंद्रगिरी,राजेन्द्र व सुरेंद्र गोस्वामी देख रहे है!

सामाजिक कार्यकर्ता व मन्दिर से जुड़े ॐ महाशक्ति ग्रुप के प्रमुख विपिन शिवहरे अपने ग्रुप के माध्यम से मंदिर में विशेष आयोजन भी करते है।प्रति सोमवार फलाहारी खिचड़ी या अन्य सामग्री का भी वितरण भी किया जाएगा।श्री शिवहरे द्वारा मन्दिर परिसर में भव्य आकर्षक गार्डन का निर्माण भी किया जा चुका है।साथ ही परिसर की आधुनिक विधुत सज्जा,पानी के फुआरे के साथ कैलाश पर्वत की मनोहारी झाँकि भी सजाई है।शिवहरे ने बताया कि इस वर्ष श्रावण के अंतिम सोमवार को नगर के कारीगरों द्वारा निर्मित विशेष झाँकि के साथ भव्य जुलुश निकाला जाएगा।

संपादक

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