सात दिवसीय भागवत कथा का हुआ समापन

संतोष गोस्वामी

Rai Singh Sendhav

भौरासा। भागवत कथा में संख्या जरूरी नहीं है लेकिन भागवत पुराण में भगवान भाव को ही सुनते हैं वह लोग सौभाग्यशाली होते हैं जो भागवत कथा के पंडाल में बैठकर कथा सुन पाते हैं। मनुष्य को घर गृहस्ती की बेड़ियों से मुक्त होकर घड़ी दो घड़ी का समय भागवत कथा के लिए निकालना चाहिए। हम किस दिशा में जा रहे हैं… हमारी संस्कृति कहां जा रही है… समझ नहीं आ रहा है। अपना घर ऐसा संस्कारी रखो कि भगवान को बुलाना ना पड़े वह खुद चले आए। मनुष्य को सुबह खड़े होकर सर्वप्रथम अपने माता पिता के चरणों में नमन करना चाहिए।

संसार में माता पिता की सेवा सर्वश्रेष्ठ पूजा होती है। जो अपने माता पिता की सेवा सच्ची श्रद्धा भाव से करते हैं, उन्हें ईश्वर धरती के समान फल प्राप्त होता है। यह प्रेरणा संदेश भागवत कथा के समापन पर कथा वाचिका सुश्री अर्चना दीदी द्वारा कहीं गई।

इस मौके पर पूरे नगर में एक विशाल चल समारोह निकाला गया। जो बाबा भंवरनाथ मंदिर प्रांगण से शुरू हुआ और संत तुलसी मार्ग से होते हुए बड़ा हनुमान चौक एमजी रोड से होते हुए बस स्टैंड से मंदिर प्रांगण पहुंचा। यहां पर श्रीमद् भागवत कथा के जुलूस का समापन हुआ।

तत्पश्चात तीन कुंटल नुक्ती प्रसादी का वितरण हुआ। इस समापन अवसर पर बच्चे महिलाएं पुरुष बड़ी संख्या में मौजूद थे व आयोजक कर्ता श्री भंवरनाथ मंदिर भागवत सेवा समिति समस्त भक्त गण उपस्थित थे।

संपादक

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