देवास में 8 करोड़ का सहकारी घोटाला बेनकाब

किसानों की जमीन बढ़ाकर फर्जी ऋण, बीमा क्लेम और खातों से निकाले करोड़ों; EOW ने दर्ज किया केस

Rai Singh Sendhav

तत्कालीन संस्था अध्यक्ष रामकन्या बाई पति तंवरसिंह चौहान सहित 4 के खिलाफ केस दर्ज

देवास/भोपाल। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने देवास जिले की राजोदा वृहत्ताकार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के खिलाफ 8 करोड़ रुपये से अधिक की सुनियोजित वित्तीय गड़बड़ी के मामले में अपराध दर्ज किया है। जांच में सामने आया कि वर्ष 2016 से 2019 के बीच किसानों की जानकारी के बिना उनकी पात्रता से अधिक ऋण स्वीकृत कर, फसल बीमा क्लेम और ऋण माफी योजनाओं का लाभ दिखाकर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई। इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन संस्था अध्यक्ष रामकन्या बाई पति तंवरसिंह चौहान की भूमिका भी जांच में सामने आई, EOW ने तत्कालीन अध्यक्ष सहित 4 अधिकारी-कर्मचारियों सहित अन्य लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।

ऐसे रचा गया पूरा खेल

EOW उज्जैन इकाई द्वारा शिकायत क्रमांक 278/19 के सत्यापन में पाया गया कि समिति और बैंक के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने मिलकर किसानों की वास्तविक भूमि से लगभग 400 हेक्टेयर अधिक भूमि दर्शाई।

• वर्ष 2016-17 में 139 हेक्टेयर
• वर्ष 2017-18 में 129 हेक्टेयर
• वर्ष 2018-19 में 137 हेक्टेयर
अतिरिक्त भूमि दिखाकर किसानों की पात्रता से 5.5 करोड़ रुपये से अधिक ऋण नियमविरुद्ध स्वीकृत किए गए।
इतना ही नहीं, तीन वर्षों में बिना वैध साख सीमा स्वीकृत किए 3 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण भी वितरित किया गया।

फसल बीमा में 65 लाख का फर्जी क्लेम

जांच में यह भी सामने आया कि करीब 300 किसानों का एक ही फसल का एक ही वर्ष में एक से अधिक बार बीमा कराया गया।
इससे 65 लाख रुपये से अधिक का बीमा क्लेम स्वीकृत कर राशि निकाली गई।
कई आवेदन पत्रों में किसानों की जगह अधिकारियों के स्वयं के मोबाइल नंबर दर्ज पाए गए, जिससे संदेह और गहरा गया।

खातों से 1.12 करोड़ की सीधी निकासी

समिति के तत्कालीन सचिव ने किसानों के ऋण खातों से विड्रॉल पर्चियों पर स्वयं हस्ताक्षर कर 1 करोड़ 12 लाख रुपये निकाल लिए।
ऑडिट में समिति की कैशबुक में भी 20 लाख रुपये से अधिक की अनियमितता प्रमाणित पाई गई।

ऋण माफी और ब्याज सब्सिडी में भी खेल

आरोपियों ने नियमविरुद्ध स्वीकृत ऋण खातों में मुख्यमंत्री ऋण माफी योजना और ब्याज सब्सिडी की राशि दर्ज कर शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
इस पूरे प्रकरण में शासन, बैंक और किसानों—तीनों को करोड़ों रुपये की हानि हुई है।

किन-किन पर दर्ज हुआ मामला

EOW ने निम्न आरोपियों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया है:
• महेश जैन – तत्कालीन सचिव एवं सहायक प्रबंधक, राजोदा सहकारी समिति
• दिलीप नागर – तत्कालीन पर्यवेक्षक
• अनिल दूबे – तत्कालीन शाखा प्रबंधक, मंडी प्रांगण शाखा, जिला सहकारी बैंक
• रामकन्या बाई – तत्कालीन अध्यक्ष, राजोदा सहकारी संस्था
• अन्य संबंधित अधिकारी

इन धाराओं में दर्ज हुआ केस

आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराएं:
• 420 (धोखाधड़ी)
• 409 (आपराधिक न्यासभंग)
• 467, 468, 471 (जालसाजी)
• 201, 120-B (षड्यंत्र)
साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 एवं संशोधन अधिनियम 2018 की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।

सवाल बड़ा है…

तीन वर्षों तक इतनी बड़ी वित्तीय गड़बड़ी होती रही और ऑडिट व बैंकिंग निगरानी तंत्र इसे पकड़ नहीं सका। अब EOW की जांच से कई और परतें खुलने की संभावना है।
यह मामला न केवल सहकारी तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि किसानों के भरोसे पर भी गहरी चोट है।

संपादक

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