
बोले– “मुझे फंसाया गया है”
देवास। लोकायुक्त पुलिस ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए बागली के महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी रामप्रवेश तिवारी को ₹5,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। कार्रवाई लोकायुक्त डीएसपी दिनेश पटेल के नेतृत्व में की गई।
कैसे सामने आया रिश्वत का मामला?
फरियादी प्रीतेश तंवर, जो बागली में ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं, ने लोकायुक्त को शिकायत की थी कि परियोजना अधिकारी द्वारा उनसे कुल ₹18,000 की रिश्वत मांगी जा रही थी। फरियादी ने पहले ही ₹4,000 दिए थे।
आज आरोपी ने शेष ₹5,000 राशि लेने के लिए उन्हें देवास बुलाया था।
फरियादी के अनुसार उनकी मासिक वेतन राशि ₹9,000 है, और परियोजना अधिकारी द्वारा लंबे समय से पैसों की मांग की जा रही थी।
कार में बैठाकर ले गए और वहीं ली रिश्वत
फरियादी को आरोपी ने देवास स्थित एमजी हॉस्पिटल के बाहर अपनी कार में बैठाया और उन्हें पंप चौराहा लेकर पहुंचे।
यहीं फरियादी से ₹5,000 का लिफाफा लिया गया, और इसी दौरान लोकायुक्त टीम ने मौके पर धावा बोल दिया।
टीम द्वारा आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर देवास रेस्ट हाउस ले जाया गया, जहां आगे की कार्रवाई की गई।
लोकायुक्त ने परियोजना अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
आरोपी का पलटवार: “मुझे षडयंत्रपूर्वक फंसाया गया”
गिरफ्तारी के बाद परियोजना अधिकारी रामप्रवेश तिवारी ने खुद को निर्दोष बताया और कहा कि—
• “मुझे योजनाबद्ध तरीके से फंसाया गया है।”
• “पर्यवेक्षक उषा पंड्या द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से 18-18 हजार रुपये फोनपे से लिए गए थे।”
• “मैंने इसकी जांच कराई थी और उनके निलंबन की सिफारिश भी की थी।”
• “फरियादी और उषा पंड्या दोनों मिले हुए हैं और मुझे फंसाया गया है।”
• “लिफाफा मेरी गाड़ी में रखवाया गया, मैंने हाथ भी नहीं लगाया। लोकायुक्त टीम ने मुझे लिफाफा पकड़वाकर हाथ धुलवाए हैं।”
तिवारी ने कहा कि वह पूरी तरह साजिश का शिकार हुए हैं और न्याय की मांग करेंगे।

