देवास। देवास में साइबर ठगी के उस अंडरग्राउंड नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है, जो देशभर में बैठे ठगों के लिए बैंक खातों को “ढाल” बनाकर करोड़ों रुपये इधर-उधर कर रहा था। होटल के एक कमरे से शुरू हुई यह कार्रवाई देखते-देखते संगठित म्यूल बैंक अकाउंट गिरोह तक जा पहुंची, जिसमें पुलिस ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

यह पूरा मामला ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत सामने आया, जिसका उद्देश्य साइबर अपराधियों की रीढ़ माने जाने वाले म्यूल खातों को खत्म करना है। देवास पुलिस को सूचना मिली थी कि औद्योगिक क्षेत्र से म्यूल अकाउंट ऑपरेट किए जा रहे हैं। 8 जनवरी को गंगानगर स्थित एक होटल में दबिश दी गई। कमरे के भीतर मौजूद पांच युवक पहली नजर में सामान्य दिखे, लेकिन मोबाइल फोन और बैंक स्टेटमेंट खुलते ही कहानी बदल गई।
करोड़ों का ट्रांजेक्शन, कोई जवाब नहीं
पूछताछ में सामने आया कि एक आरोपी के दो करंट खातों में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है। रकम कहां से आई, किसे गई—इसका कोई वैध जवाब आरोपियों के पास नहीं था। डिजिटल जांच में पता चला कि ये लोग टेलीग्राम के जरिए सक्रिय साइबर ठगों के लिए काम कर रहे थे। ठग शेयर मार्केट में निवेश का झांसा देकर देशभर के लोगों से पैसे ऐंठते और म्यूल खातों के जरिए रकम घुमा देते थे।
पांच से नौ तक पहुंची गिरफ्तारी
डिजिटल ट्रेल का पीछा करते हुए पुलिस ने इस नेटवर्क के चार सीनियर एजेंट्स तक पहुंच बनाई, जो म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने का काम कर रहे थे। इस तरह कुल 9 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। जांच में यह भी सामने आया कि युवाओं को लालच देकर उनके खातों को किराए पर लिया जाता था और उन्हें साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर करने में इस्तेमाल किया जाता था।
क्या-क्या बरामद हुआ
कार्रवाई में पुलिस ने 19 अत्याधुनिक मोबाइल फोन, 2 लाख रुपये नकद, दर्जनों बैंक दस्तावेज, चेकबुक, एटीएम कार्ड, आधार-पैन कार्ड, वाई-फाई डिवाइस और ठगी में इस्तेमाल की गई टाटा नेक्सॉन कार जब्त की। साथ ही करीब 13 लाख रुपये की ठगी की राशि बैंक खातों में फ्रीज कराई गई है। कुल मिलाकर लगभग 30 लाख रुपये के मश्रुका और रकम पर पुलिस का शिकंजा कस चुका है।
अभी और खुलासों की उम्मीद
पुलिस का कहना है कि यह नेटवर्क सिर्फ देवास तक सीमित नहीं है। जांच के दौरान कई अन्य खातों और संपर्कों की जानकारी सामने आई है, जिनकी पड़ताल जारी है। ऑपरेशन मैट्रिक्स के जरिए पुलिस का फोकस अब सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उस पूरे फाइनेंशियल सिस्टम को तोड़ने पर है, जिस पर साइबर ठगी टिकी हुई है।
देवास की यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि साइबर अपराध अब सिर्फ ऑनलाइन नहीं, बल्कि जमीन पर मौजूद संगठित गिरोहों के सहारे चल रहे हैं— और पुलिस अब उन्हीं जड़ों पर वार कर रही है।

