यौन अपराध में तत्कालीन एसडीएम अभय सिंह खरारी दोषी, 10 साल की सजा

Rai Singh Sendhav

पद का दुरुपयोग पड़ा भारी

1.01 लाख का अर्थदंड भी, तृतीय एडीजे कोर्ट का सख्त फैसला

उज्जैन। मध्य प्रदेश के बड़वानी के तत्कालीन एसडीएम अभय सिंह खरारी को अधीनस्थ महिला कर्मचारी के साथ यौन अपराध के मामले में अदालत ने दोषी करार दिया है। माननीय तृतीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रेखा चंद्रवंशी की अदालत ने आरोपी को अलग-अलग धाराओं में 10 वर्ष और 1 वर्ष के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने आरोपी पर कुल 1 लाख 1 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

फिलहाल अभय सिंह खरारी डिप्टी कलेक्टर के पद पर उज्जैन में पदस्थ हैं। अदालत के इस फैसले को प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

2016 का मामला, अधीनस्थ महिला ने की थी शिकायत

अतिरिक्त लोक अभियोजन अधिकारी शिवपाल सिंह सिसोदिया के अनुसार, यह मामला वर्ष 2016 से जुड़ा है। उस समय आरोपी उज्जैन में एसडीएम पद पर पदस्थ था और पीड़िता उनकी अधीनस्थ कर्मचारी थी। आरोप है कि आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए महिला के साथ यौन अपराध किया।

घटना के बाद पीड़िता ने बड़वानी में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। लंबी जांच और सुनवाई के बाद मामला अदालत में विचाराधीन रहा।

किन धाराओं में हुई सुनवाई

पुलिस द्वारा आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 सहित अन्य गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया था। अदालत ने गवाहों, दस्तावेज़ों और सबूतों के गहन परीक्षण के बाद आरोपी को दोषी पाया।

अदालत की सख्त टिप्पणी

न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि

“सरकारी पद पर रहते हुए अधीनस्थ महिला के साथ किया गया अपराध अत्यंत गंभीर है। पद का दुरुपयोग कर किया गया ऐसा कृत्य किसी भी स्थिति में सहन नहीं किया जा सकता।”

सज़ा और जुर्माना

अदालत ने आरोपी को

• एक धारा में 10 वर्ष का कठोर कारावास,

• दूसरी धारा में 1 वर्ष का अतिरिक्त कारावास,

• और 1,01,000 रुपये का अर्थदंड लगाया है।

जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त सज़ा का भी प्रावधान रखा गया है।

प्रशासनिक हलकों में हलचल

पीड़िता को न्याय मिलने के बाद यह मामला प्रशासनिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सरकारी पदों पर बैठे अधिकारियों को स्पष्ट संदेश देता है कि अधिकारों का दुरुपयोग कर किए गए अपराधों पर न्यायपालिका सख्त रुख अपनाएगी।

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