जब भी मालवांचल में आना होगा 10 दिन बागली को दूंगा-पद्मभूषण आचार्य रत्नसुंदरसूरी जी

बागली नगर के जैसी सौहार्दता कही नही दिखी

महाराज श्री बागली से हुआ विहार, श्रद्धालु हुए भाव-विभोर

सोमेश उपाध्याय

Rai Singh Sendhav

बागली।पूरे देश मे विहार किया,कई लोगो से मिला पर बागली के जैसी सौहार्दता कही देखने को नही मिली।इस बार ज्यादा नही रुक सकता परन्तु वादा करता हु,जब भी मालवांचल आना होगा,बागली को 10 दिन जरूर दूंगा। बागली नगर की सामाजिक सौहार्दता और समरसता से भरे अपार जनसमूह को देखकर प्रफुल्लित होकर कहा यहां ऐसा लग रहा है जैसे मैं बड़े महानगर में आया हूं। इतना वात्सल्य और कहीं नहीं देखा। उक्त बातें पद्मभूषण आचार्य श्रीमद् विजय रत्नसुंदर सूरीश्वर महाराज ने प्रेरक प्रवचन माला के अंतिम दिन स्थानीय गाँधीचोक पर कहे ! अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि झोपड़ पट्टी में रहने वाले के पास भी गुड थाट, गुड मेमोरी और गुड नेचर होता है, लेकिन क्या ये तीनों आपके पास है। साधु जीवन की ताकत भी ये तीनों है। इनसे हर हाल में मजे में रहा जा सकता है। याद रखना मैं मजे में हंू यह बोलने की ताकत पैसे से नहीं आएगी। पांच सौ करोड़ के मालिक को भी केंसर होने पर आनंद चला जाता है, लेकिन गुड थाट, गुड मेमोरी और गुड नेचर जहां होते है, वहां हमेशा खुशी रहती है। मजे में रहने की एक ही कसौटी यह है कि जीवन में कभी शिकायत का भाव नहीं रहना चाहिए।
नहीं है। दुनिया इधर की उधर हो जाए तो भी में मजे में हूं कहने की ताकत गुड थाट, गुड मेमोरी और गुड नेचर से ही आती है।
आचार्यश्री ने नव दीक्षिता साध्वी निष्ठानिधि श्रीजी को बड़ी दीक्षा के मार्मिक और भाव भरे आयोजन में दिए।आचार्य श्री ने आगे कहा कि वेल अंडरस्टैंडिंग एक अच्छी समझ हमें मार्ग में सरलता प्रदत्त करती है और मिसअंडरस्टैंडिंग गलतफहमी, कभी कभी अच्छे अवसरों को छोड़ देती है प्रगाढ़ मित्रता में दरार पैदा कर देती है इसलिए गलतफहमी जैसे शब्द को डिलीट करना हमारे लिए टॉनिक का काम है ।रॉयल पथ उचित रास्ता जिस प्रकार हम अपने घर आने के पहले कई प्रकार की गलियां आने पर भी उन गलियों में ना जाते हुए सीधे घर आते हैं उसी प्रकार हमें उचित रास्ता चुनना है। ताकि हम भटके नहीं उदाहरण के लिए ट्रेक पर चलने वाली ट्रेन लेट अवश्य हो जाती है ,लेकिन गुम नहीं होती उसी प्रकार ईश्वर से मिलने की चाह यदि हमने ठान ली है,
हमे ईश्वर जहां भी मिले जब भी मिले हम उस रास्ते पर चलने लगे तो एक न एक दिन ईश्वर से अवश्य मुलाकात होगी और जिस दिन लगे की मुलाकात नहीं हो पाई तो आप स्वयं ईश्वर तुल्य बन जाओगे ।विगत दिनों भारत की रैंकिंग लिस्ट प्रसारित हुई जिसमें धनाढ्य लोगों में भारत का छठा नंबर आया इकोनामिक दृष्टि से खुशी की बात रही दुख की बात यह रही कि जब हैप्पीनेस खुशी वाले देशों में हमारा नंबर पूर्व में 5 नंबर पर था वह हटकर 122 नंबर पर पहुंच गया। हम कैसे विश्वास करें कि पैसे से खुशी आती है यहां पैसे में छठे नंबर पर खुशी में इतने पीछे चले गए पैसा सब कुछ नहीं है खुशी देने में कभी भी सक्षम नहीं है ।सत्य निष्ठा बनी रहना चाहिए विश्वास धरण होना चाहिए।
इसके लिए हमें स्वभाव में परिवर्तन करना होगा हमारा स्वभाव सभी के प्रति बेहद अच्छा रहे। अंतिम दिन प्रभावना स्वरूप विजय रत्न सुंदर सुरीश्वर जी के हाथों लिखी पुस्तकों का निःशुल्क वितरण हुआ ।समाज के वरिष्ठ जन एवं युवा साथी व्यवस्था संभाल रहे थे ।आखरी दिन संख्या में बढ़ोतरी देखकर गुरुवर ने कहा कि मुझे यहां कर लग रहा है कि यह बागली नहीं संपूर्ण समाज संपूर्ण विचार धाराएं यहां पर आई है और यह दृश्य मानस पटल पर कभी ना भूलने जैसा है इस दृश्य को डिलीट करने वाला बटन हमेशा के लिए बंद हो गया है कार्यक्रम में दूर-दराज से आए अतिथियों का अभिनंदन बागली नगरवासियों एवं जैन संघ परिवार द्वारा किया गया। आचार्य श्री का भी अभिनंदन बागली की कई संस्थाओं एवं पारिवारिक लोगों द्वारा किया गया महिला शक्तियों ने भी मंच विराजित महा सतीयो का अभिनंदन किया।उन्होंने बागली वासियो को कहा कि पाँच उंगली में विषमता जरूर है,पर विरोधिता नही,इसी प्रकार बागली में हर कम्युनिटी में विषमता है पर विरोधिता नही,बस इसे बनाए रखना। रखबचंद दिलीप नाहर परिवार ने नवकारसी व स्वामी वात्सल्य का लाभ लिया। संचालन विनय बोथरा ने किया।

संपादक

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1 thought on “जब भी मालवांचल में आना होगा 10 दिन बागली को दूंगा-पद्मभूषण आचार्य रत्नसुंदरसूरी जी”

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